Ganesh Chaturthi 2020-गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) हिन्दू धर्म का एक बहुत ही मुख्य त्योहार है| यह पूरे भारत में बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है| खासकर महाराष्ट्र में यह पर्व बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है|पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवन गणेश का जन्म हुआ था, इसीलिए इस दिन को ही गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के रूप में मनाते हैं|कई जगहों में तो बड़े-बड़े पंडाल सजाया जाता है| गणेश जी का बहुत बड़ा-बड़ा एवं शोभनीय प्रतिमा स्थापित किया जाता हैं|प्रतिमा की पूजा 10 दिनों तक की जाती है, उसके बाद 11 वें दिन बहुत ही धूम-धाम के साथ नदी, तालाब या समुन्द्र में विसर्जन कर दी जाती है|तथा कामना की जाती है की बाप्पा अगले साल जल्दी आवे|

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) कब शुरू और कब समाप्त होती है

गणेश चतुर्थी अगस्त और सितम्बर महिना के बीच भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन से आरम्भ होती है| इसका समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होती है|

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) भाद्रपद शुक्ल पक्ष के दिन ही क्यों होती है

पुराणों के अनुसार एक दिन जब माता पार्वती अपने महल में अस्नान करने के लिए गये तो उन्होंने अपने शरीर के मैल से एक बालक का उत्पन्न किया और कहा की तुम द्वार में पहरा दो ताकि कोई भी अन्दर न आ पाए और बिना मेरे अनुमति का किसी को भी अन्दर आने मत देना|

महल के अन्दर जाते ही वह महादेव पधारे लकिन गणेश जी ने उन्हें रोका तो महादेव को बहुत क्रोध आ गया उन्होंने गणेश जी से बोला की मझे अन्दर जाने दो परन्तु गणेश जी बहुत हट्टी बालक थे|वह नही माने तो दोनों के बीच युद्ध शुरू हो गया| युद्ध का कोई भी परिणाम न आता देख अंत में महादेव ने अपना त्रिशूल से गणेश जी का सर को धर से अलग कर दिया|

जब माता पार्वती को इस बारे में पता चली तो माता बहुत क्रोधित हो गयी और महादेव से बोली की आपने यह किया किया अपने ही पुता का वध कर दिया| महादेव भी बहुत दुखी हो गये जब उनको पता चला की गणेश उनका ही पुत्र था|सभी देवता गण भी वहा आ गये और भगवान विष्णु से महादेव से कहा की महामिर्तुन्जय मंत्र के द्वारा इनको पुनर्जीवित कर दें|

परन्तु महादेव के त्रिशूल के द्वारा कटा हुआ चीज कभी नही जुड़ सकता था| तब महादेव ने भगवान विष्णु से कहा की उत्तर दिशा की और जो भी जिव मिले आप उसका सर काट के लाये जिसे जोड़ कर मई इसको पुनर्जीवित कर दूंगा| भगवान विष्णु निकल गये ढूढने और कुछ देर पश्चात् एक हाथी के बच्चे का सिर लेकर आये और महादेव से बोले की उत्तर दिशा में केवल यही जिव मिला|

फिर महादेव ने उसको पुनर्जीवित कर दिया और सभी ने उनका नाम गजानन रखा| यह सब घटना भाद्रपद शुक्ल पक्ष के दिन ही घटित हुई थी|अर्थात भगवन गणेश का जन्म हुआ| तभी से हम सब भगवान गणेश के जन्म दिन को ही गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते हैं|

गणेश उत्सव दस दिनों तक क्यों मनाया जाता है आइये जानते हैं

धर्म ग्रंथो के अनुसार जब भगवन वेदव्यास गणेश जी को महाभारत की संपूर्ण कथा सुना रहे थे| और उनकी आँखे कथा सुनाते वक्त बंद थी| जब कथा 10 दिन के बाद समाप्त हुई और उन्होंने अपनी आँखे खोली तो गणेश जी को देख कर बहुत ही चकित हो गये|

क्योंकि गणेश जी का पूरा शारीर का तापमान बहुत ही ज्यादा बढ़ गया था| फिर भगवन वेदव्यास ने गणेश जी को एक जल कुंड में ले जाकर अस्नान करवाया| तब भगवन गणेश का शरीर का तापमान सामान्य हुआ|

अत: तभी से हम सब गणेश उत्सव 10 दिन तक मनाते हैं| और 11 वें दिन उनकी प्रतिमा को विसर्जन कर दिया जाता है|

Ganesh Chaturthi की पूजा कैसे किया जाता है

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Ganesh Chaturthi

प्रात:काल अपने नित्यकर्म से निवृत होकर, गणेश जी की प्रतिमा को कोरे कलश में जलभरकर, मुहं पर कोरा कपड़ा बांधकर स्थापित किया जाता है| फिर मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाकर षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए|

गणेश जी को दक्षिणा अर्पित करके 21 मोदकों का भोग लगावें एवं गणेश जी की पूजा अर्चना एवं आरती करके 21 में से 5 मोदक को प्रतिमा के पास रख कर बाकि बचें मोदक को ब्रह्मणों में बाँट दें|

पूजा के बाद दृष्टि निचे रखते हुए चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए|परन्तु चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए क्योकि इस दिन चंद्रमा का दर्शन करने से कलंक का भागी बनना पड़ता है|चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देना चाहिए|

गणेश जी का पूजा करने से विद्या, बुद्धि एवं ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही साथ विघ्न-बाधाओं का भी समूल नाश हो जाता है|

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गणेशजी का पूजा सबसे पहले क्यों किया जाता है

पुराणों के अनुसार भगवन महादेव और माता पार्वती के दो पुत्र हैं, पहला भगवान गणेश और दूसरा भगवन कार्तिकेय जब दोनों भाई में एक दिन खेलते-खेलते एक बात को लेकर बहस हो गयी की हम दोनों में श्रेष्ठ कौन हैं|और दोनों के बीच बहस लम्बी होने लगी तो नंदी ने उन्हें अपने माता-पिता के पास जाने को कहा और बोला की वही दोनों यह बता देंगे की तुम दोनों में श्रेष्ठ कौन है|

फिर दोनों भाई अपने माता-पिता के पास गये और पूरी बात बताई तो महादेव और माता पार्वती ने कुछ क्षण सोचने के पश्चात् दोनों भाई से कहा की तुम दोनों में से जो भी पूरी पृथ्वी की परिक्रमा 3 बार करने के बाद यहाँ पहले पहुचेगा वही श्रेष्ठ कहलायेगा|

यह बात सुनते ही कार्तिकेय ने अपनी सवारी मोर में बैठ गया और उड़ के परिक्रमा करने निकल गये| परन्तु गणेश जी का सवारी तो चूहा है तो गणेश जी बहुत ही दुखी भाव होकर बैठे बैठे सोचने लगा की मई इस छोटे से जीव में बैठकर कैसे पुरे ब्रह्माण्ड की परिक्रमा कर पाउँगा|

ऐसे ही बैठे बैठे उसे एक बात सूझी और अपने माता-पिता के चरणों में प्रणाम करके उनदोनों का ही 3 बार परिक्रमा करके बोला की मेरे लिए माता-पिता ही पूरा ब्रह्मांड है| इसीलिए मैंने आपदोनो का ही परिक्रमा कर लिया| यह सुनते ही भगवान शिव और माता पार्वती दोनों बहुत प्रसन्न हो गये और उसका ऐसा करना दोनों को बहुत अच्छा लगा| सभी देवता गण भी उपस्थित होकर भगवान गणेशजी का प्रशंसा किया|

और कुछ देर बाद कार्तिकेय भी परिक्रमा कर वापस आया तो देखा गणेशजी वह पहले से पहुचे हुए है तो आश्चर्यचकित होकर बोले चूहा से इतनी जल्दी कैसे पुरे ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लिया| तब नंदी ने उनसे साडी बाते कही जो कुछ हुआ|तब कार्तिकेय भी माने की गणेश से बुद्धि के मामले में कोई व् नही जीत सकता है एवं उसने भी गणेश जी को ही विजेता घोषित किया|

तत पश्चात् सभी देवी देवता गण एवं भगवान महादेव और माता पार्वती ने गणेश जी को श्रेष्ठ मानते हुए सबसे पहला पूजा का वरदान दिया और कहा की धरती पर सबसे पहला पूजा गणेश पूजा ही होगा उसके बाद ही कोई पूजा होगा|और गणेश पूजा करने से सभी कार्य सफलता पूर्वक संपन्न होगा, घर में ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होगी

तभी से हम सब जब भी कोई वभी पूजा क्यू न करें लेकिन पहला पूजा गणेश पूजा ही किया जाता है| ताकि सब काम निर्विघन हो जाये और कोई भी बाधा न आये|

भारत में गणेश उत्सव कब से धूम-धाम से मनाया जाने लगा है

गणेश उत्सव तो प्राचीन काल से ही मनाया जा रहा है| परन्तु भारत में 1893 से पूर्व केवल घरों में ही मनाया जाता था| उस समय इतना धूम-धाम से नहीं मनाया जाता था|1893 ईस्वी में बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजो के विरुद्ध एक जुटता करने के लिए बड़े पैमाने पर इस उत्सव का आयोजन किया जिसमे अनेक लोगों ने हिस्सा लिया|

यह आयोजन तिलक ने महाराष्ट्र में किया था|इसीलिए पुरे महाराष्ट्र में आज भी बड़े धूम-धाम के साथ गणेश उत्सव मनाया जाता है|

गणेश जी के कुछ अन्य नाम

  • कपिल
  • लम्बोदर
  • विघ्नहर्ता
  • विनायक
  • धूमकेतु
  • एकदंत
  • गजानन
  • गणाध्यक्ष
  • सुमुख
  • गजकर्ण
  • भालचंद्र
  • विकट

गणेश उत्सव (Ganesh Chaturthi)पर 10 लाइन

  1. यह पर्व गणेश जी के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है|
  2. गणेश उत्सव भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन मनाया जाता है|
  3. यह उत्सव हिन्दू धर्म का सबसे विशाल उत्सव है|
  4. यह पर्व महाराष्ट्र में बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है|
  5. Ganesh Chaturthi के दिन बड़े-बड़े पंडाल सजाये जाते है एवं गणेश जी की मूर्ति स्थापित किया जाता है|
  6. भगवान गणेश का प्रिय मोदक है इसीलिए इनके पूजा में मोदकों का भोग लगाया जाता है|
  7. पूरे 10 दिन तक गणेश जी का पूजा किया जाता है, एवं 11 वें दिन उनके प्रतिमा को जल में विसर्जित कर दिया जाता है |
  8. गणेश जी का पूजा करने से सभी रुके हुए कार्य निर्व्घिन संपन्न हो जाते है|
  9. इस दिन सभी लोग गणेश जी की आरती एवं उनके मंत्रो का उच्चारण करते है|
  10. इस दिन देश के बड़े-बड़े बॉलीवुड स्टार एवं देश के जाने माने लोग बड़ी धूम-धाम से गणेशजी का पूजा करते है|

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